पक्षी और मैं



उड़ते पक्षी के पंजे को देख
नज़र अपनी हथेली पर गयी,
धूल लगी हर उस धरती की जहाँ उसने
की भोजन की खोज..
मैं तांकू उस रेखा को जो दिखाए हैं जाना
अब मुझे कहाँ ..

हवा में तैरते उसके पंख करते है नाद
उसके हौसलों का..
मैं तांकू कोई शख्स जो दिलाये याद मैं करने में हूँ सक्षम
ना जाने क्या-क्या!

हर क्षण दिशा पलटते नेत्र उसके..
दिलाएं स्मरण मुझे मेरे मन का ..
है कितनी समानता उस पक्षी और मुझ में
यह बात करती नही हैरान..
क्यूंकि  जानता हूँ अगर उड़ सकता है वो
तो मैं तो उसको उड़ाना जानता हूँ!

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