काठ



धधकती हुई अग्नि का स्वर है प्रचंड
इसके साथ खेलने में है मेरा मन हमेशा  मग्न ..

ज्वलनशील काठ का दृश्य है अनूठा 
इसकी केसरी सतह देख प्रेम है मुझे हुआ ..

इस देह के अंत में योगदान है इस काठ का
भू तत्त्व लिए यह  प्रतिनिधित्व करे संसार का ..

भस्म है इसका अंतिम रूप कितना मनोरम है 
महाकाल का वस्त्र यह इसका सौभाग्य है |

वृक्ष के रूप में मनुष्य का करे जीवन भर कल्याण ..
श्मशान में भी उद्धार करे यह काठ मनुष्य का..
इसको है मेरा प्रणाम |

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